tag:blogger.com,1999:blog-13053295.post7862957106600406538..comments2008-05-08T21:44:27.671-07:00Comments on * लखनवी *: वो कौन थी?अतुल श्रीवास्तवhttp://www.blogger.com/profile/17285074473402112374noreply@blogger.comBlogger7125tag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-49474796536861410412008-05-08T21:44:00.000-07:002008-05-08T21:44:00.000-07:00अच्छी कहानीअच्छी कहानीPiyush (Amrit)http://www.blogger.com/profile/00430934520633179213noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-27612837860162101132007-08-15T11:09:00.000-07:002007-08-15T11:09:00.000-07:00Atul, dheere dheere tumhari kahaniyon mein gahrayi...Atul, dheere dheere tumhari kahaniyon mein gahrayi aati ja rahi hai. Chaayavaaad aur rahasyavaad ki or barh rahe ho! <BR/><BR/>Par shaayad har sochne wale ki yahi niyati hai. Sundar likha hai. Age bhi likhte raho. <BR/><BR/>Shubhkaamnaon sahit.Shailendrahttp://www.blogger.com/profile/04678871664932918025noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-82846493566074222512007-06-07T07:43:00.000-07:002007-06-07T07:43:00.000-07:00ओहो मैने तो अंत कुछ और ही सोचा था... पर कहानी मजे...ओहो मैने तो अंत कुछ और ही सोचा था... पर कहानी मजेदार लगी... क्यूँकि कुछ अलग सी नवीन भावो के साथ रही :)ग़रिमाhttp://www.blogger.com/profile/12713507798975161901noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-75222057396798242762007-06-06T00:37:00.000-07:002007-06-06T00:37:00.000-07:00कहानी बहुत अच्छी लगी और लखनऊ के फोटो भी अच्छे लगे।...कहानी बहुत अच्छी लगी और लखनऊ के फोटो भी अच्छे लगे।mamtahttp://www.blogger.com/profile/05350694731690138562noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-80864124736846233742007-06-05T18:10:00.000-07:002007-06-05T18:10:00.000-07:00स्मृतियाँ बहुत निष्ठुर होती हैं. जितना छिपाने की क...स्मृतियाँ बहुत निष्ठुर होती हैं. जितना छिपाने की कोशिश करी जायेगी, उतना ही सामने आ कर खड़ी होती जायेंगी. इन स्मृतियों में जीवन का कितना वक्त छिपा पड़ा है और वक्त में कितने लमहे - कुछ मीठे, कुछ नमकीन, कुछ चटपटे और शायद कुछ कड़वे भी. इन सब स्मृतियों और यादों के साथ कुछ चेहरे भी जुड़े हैं - अपनों के चेहरे जो वास्तविकता में तो शायद हाथ छुड़ा कर चले गये हों लेकिन इन निष्ठुर यादों ने उन्हें वैसा ही संजो कर रखा है. उन अपनों से जो इन यादों में आज भी बसे बसे हैं, हम कैसे बच पायेंगे? <BR/><BR/>यादों में वो<BR/>सपनों में है<BR/>जायें कहाँ<BR/>धड़कन का बंधन तो धड़कन से है. <BR/><BR/>सपनों को दूँ मैं कैसे भुला<BR/>अपनों से हूँ मैं कैसे जुदा.अनुराग श्रीवास्तवhttp://www.blogger.com/profile/03416309171765363374noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-42697154158385992582007-06-05T14:10:00.000-07:002007-06-05T14:10:00.000-07:00बड़ी झटकेदार मगर अच्छी कहानी है. बीच बीच में तो डर ...बड़ी झटकेदार मगर अच्छी कहानी है. बीच बीच में तो डर सा लगने लगा. मगर जरा जल्दी खत्म हो गई.Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-13053295.post-28917146746113565002007-06-05T10:36:00.000-07:002007-06-05T10:36:00.000-07:00अईयो ! अच्छा खासा संसपेंस वाला प्लाट बना कर पूरी क...अईयो ! अच्छा खासा संसपेंस वाला प्लाट बना कर पूरी कहानी की अकाल मृत्यु करवा दी आपने !<BR/><BR/>हम तो सोच रहे थे कि आपको रामसे ब्रदर्श से मीलने के लिये कहें ....<BR/>वैसे कहानी अच्छी लगी !आशीषhttp://hindigram.orgnoreply@blogger.com