मंगलवार, मार्च 13, 2007

महा यज्ञ

एक ट्रक ने बकरी को कुचला,
पाँच ट्रक स्वाहा.
..........एक मूर्ति को किसी ने रंगा,
..........कई गाड़ियों के डिब्बे स्वाहा.
आरक्षण का समाचार उड़ा,
बीस नगर बसें स्वाहा.
..........एक चलचित्र नगर में लगा,
..........दिखाने वाला हॉल स्वाहा.
आज कुछ करने को नहीं,
सड़क के बीच में नेताओं के पुतले स्वाहा.
..........फिर से हार के आ गये,
..........कुछ एक खिलाड़ियों के घर स्वाहा.
बेरोज़गार युवक भड़के,
सड़क पर खड़ी कारें स्वाहा.
..........चलो दंगा करें,
..........सौ हिन्दू और सौ मुसलमान स्वाहा.
अब सब मिल कर कहें,
स्वाहा, स्वाहा, स्वाहा – पूरे देश का स्वाहा.

अब सभी श्रद्धालु लोग अपने अपने मस्तक पर इस पवित्र राख का टीका लगा लें.
*****

6 टिप्‍पणियां:

manisha ने कहा…

ohm! shanti shanti shanti....aacha katacha hai

बेनामी ने कहा…

Dear Atul. Thanks. Have been enjoying your writings.keep it up.

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा…

एक स्वाहा भूल गये,

घर आया 'ओनीडा' टी वी
पड़ोसी हुआ स्वाहा.

ranju ने कहा…

bahut sahi aur aacha likha hai aapne ..

ranju

Tarun ने कहा…

मान गये क्या गागर में सागर भरा है, ये पोस्ट हम से छुट कैसे गया

amarjeet kaunke ने कहा…

so beautiful....hamare desh k loktantar par is se bada kataksh nahi ho sakta....swaha swaha.....