मंगलवार, मार्च 13, 2007

समस्या

यदि आप पुरुष जाति के हैं और मेरी इस समस्या को पूरा पढ़ने का धैर्य रखते हैं, तो इसे पढ़ने के उपराँत मुझे इस समस्या समाधान की कोई उपयुक्त युक्ति सुझायें. अपनी समस्या लिखने से पूर्व मैं सर्व प्रथम आप को एक ऐसी अदृश्य “वस्तु” से अवगत कराना चाहूँगा जो कि मेरी समस्या का एक आधार है.

ऊपर निवास करने वाले भगवान ने संसार की सभी पत्नियों, चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, वर्ण या देश की हों, को एक अदृश्य एवं अत्यंत शक्तिशाली पति-वेधी शस्त्र से लैस कर रखा है – और, ये शस्त्र है एक डेटाबेस. संसार की सभी पत्नियाँ इस डेटाबेस का उपयोग अपने अपने पतियों के दुष्कर्मों और कुकर्मों का लेखा संजो कर रखने के लिये करती हैं. पतियों के दुष्कर्मों और कुकर्मों के कुछ एक उदाहरण देखिये – 1.) आपने 14 अप्रैल सन 1996 को मेरी मामी के घर, जब हम वहाँ उनकी भतीजी के मुंडन में गये थे, सबके सामने भोंदू कह कर मुझे बे-इज्जत किया था. और, ये सुन कर आपका छोटा भाई मुँह पर हाथ रख कर बंदर की तरह ही ही कर के हँसा था. 2.) सात साल पहले आप मेरे सत्ताईसवें जन्मदिन के दिन सुबह सुबह उठ कर हैप्पी बर्थ-डे कहना भूल गये थे. अब तक तो आप मेरे कहने का तत्पर्य समझ ही गये होंगे. दुर्भाग्यवश इस डेटाबेस का खाता विवाह से पहले की मुलाकात के समय ही खुल जाता है. पत्नियाँ किसी भी समय इस डेटाबेस में से आपके करोड़ों अरबों संरक्षित कुकर्मों में से स्तिथि के अनुरूप किसी एक कुकर्म का संपूर्ण विवरण मिसाईल की तरह आपके ऊपर गिरा देती हैं.

अब लीजिये मेरी दुविधा गाथा सुनिये –
वैसे तो मैं पूजा पाठ करता नहीं हूँ पर पत्नी जी की मन की लालसा को भाँपते हुये मैं पिछले सप्ताहाँत सपरिवार एक परिचित के घर पूजा पाठ के लिये चला गया. परिचित महोदय ने मुझ अनभिज्ञ को इस तथ्य से अवगत कराया कि देवी माँ के समक्ष हाथ जोड़ कर सच्चे हृदय से की गयी प्रार्थना 88.708% अवश्य पूरी होती है.

बस ये सुनना था कि पत्नी जी ने त्वरित गति से दोनों हाथ जोड़ कर आँखें मूँदी और धीरे से पाँच या सात सेकेंड कुछ बुदबुदा दिया. फिर बड़ी प्रेम की भावना से मेरे सर के ऊपर बचे खुचे बालों में उंगलियाँ फिराते हुये कहा, “मैंने तो माँगा कि अगले जन्म में भी तुमसे ही विवाह हो.” मैंने सुबह सुबह ही उठ कर पूरे घर में वैक्यूम किया था और सभी लोगों के तकरीबन 25 या 30 कपड़ों में स्त्री (आयरन) किया था – ये सब शायद उसी का परिणाम था. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुये पत्नी जी ने कहा, “अब तुम भी देवी माँ से वही माँग लो जो मैंने माँगा है - कि अगले जन्म में भी तुम्हारा मेरे साथ ही विवाह हो. क्यों तुम भी यही माँगोगे न?”

बस यही है मेरी दुविधा – यदि हाँ कहूँ तो मुसीबत ये है कि अभी तक मेरे जितने भी कुकर्म डेटाबेस में संजोये गये हैं और बाकी के जीवन के भी जो कुकर्म इस डेटाबेस में संजोये जायेंगे, वो सब के सब अगले जन्म में पहले फेरे के बाद ही पत्नी जी को प्रक्षेपास्त्र के रूप में पके पकाये मिल जायेंगे. और, यदि न कह दिया तो अगले कई सप्ताहों तक मौन-अस्त्र का सामना करना पड़ेगा, सम्भवतः अपना वजन कम करने का बहाना मिल जायेगा और मेरा ये कुकर्म डेटाबेस में जाकर शेष जीवन भर चौड़ा सा मुँह खोल कर मुझे उलाहना देता रहेगा. संक्षिप्त में – हाँ कहूँ तो कोड़ों की मार और न कहूँ तो जूतों की मार.

खैर उस समय तो मैंने स्तिथि सँभाल ली (मेरा दिमाग चाचा चौधरी के दिमाग से भी तेज चलता है). मैंने अपने भय को छुपाते हुये निडर हो कर कहा, “मैं तो गणेश का भक्त हूँ. इतनी मूल्यवान प्रार्थना तो मैं दीपावली के दिन लम्बोदर के चरणों में ही करूँगा.”

उस समय तो जान बच गयी पर अब समस्या ये है कि दीपावली बस अब कुछ ही दिन दूर रह गयी है और मेरे दिमाग में अभी तक कोई युक्ति नहीं आयी है जो कि मेरे इस और अगले दोनों जीवनों को कष्ट रहित बना दे (क्या करें चाचा चौधरी का साबू मेरा दिमाग चुरा ले गया है).

हे मेरे प्रिय ब्लॉग पाठकों यहीं आपके सहयोग की आवश्यक्ता है. “टिप्पणी” पर क्लिक करें और मेरी इस दुविधा का समुचित समाधान दें - कि मैं पत्नी जी को क्या बताऊँ कि मैंने गणेश जी से क्या माँगा. यदि आप विवाहित हैं तो आपको ये बताने की आवश्यक्ता नहीं है कि “मैं भूल गया और कुछ और ही माँग बैठा” सही उत्तर नहीं है और ये डेटाबेस के उच्चतम श्रेणी के कुकर्म के अंतर्गत आता है.

अपने भाई, बन्धुओं, सखा, मित्रों और रिश्तेदारों से भी कहें कि इस नेक काम में हिस्सा ले कर एक “ब्लॉगर” की सहायता करें. सर्वश्रेष्ठ उत्तर (जिसका मैं प्रयोग करूँगा) देने वाले पाठक को दंडवत नमन कर के यहाँ पर सम्मानित किया जायेगा.

सधन्यवाद,
एक पति.

17 टिप्‍पणियां:

Pratyaksha ने कहा…

समस्या वाकई गँभीर है । सात जन्मों के बँधन में ये कौन सा वाला जन्म है , ये पता करें पहले , डेटा ओवरफ्लो हो रहा हो क्या पता :-)

rachana ने कहा…

पत्नी ने कहा कि उन्होने ये माँगा है,और आप मान गये की ये सच है?? अभी आपने आपने पत्नी को समझा ही नही है!

संजय बेंगाणी ने कहा…

एक सच्चे पुरूष की तरह काम ले. पत्नि से कहे, "तुम्ही मेरी आँखे में बसी हो". फिर एश्वर्या की कल्पना कर प्रार्थना करें, "हे, देवी जो मेरी आँखो में बसी हैं वही मुझे अगले जन्म में मिले".
धन्यवाद. अब हमारी फिस पँहुचा दें.

Tarun ने कहा…

kaise likhe?

Ashish Gupta ने कहा…

बहुत सही अतुल जी! संजय जी की बात में दम है।

???? ने कहा…

अमां मियां टेन्शन नही लेने का। गणेश जी को टेन्शन लेने दो। आप तो अपनी पत्नी को बोलो, मैने भगवान से मांगा कि मेरी पत्नी की सभी उचित मांगो/इच्छाओं की पूर्ति हो। बस

अब उचित और अनुचित गणेश जी का प्राबलम है, आपका नही। भगवान ऐसे आड़े वक्त मे काम नही आयेंगे तो कब आएंगे?

जीतू ने कहा…

पिछली कमेन्ट मैने की थी, पता नही डा.साहब के नाम से कैसे आ गयी
-जीतू

बेनामी ने कहा…

Maango apne man ki , kaho patni ke man ki

DR PRABHAT TANDON ने कहा…

[जीतू said...
पिछली कमेन्ट मैने की थी, पता नही डा.साहब के नाम से कैसे आ गयी
-जीतू ]
पर जीतू भाई , मैने तो नही की थी , मै तो आज ही अपने शहर का नाम देख कर चौंका तो मैने भी कहा चलो इसी बहाने इधर भी घूम आयें, लेकिन यहां तो महफ़िल देखकर मजा आ गया, भाई लखन्वी बस इसी तरह लगे रहिये.

अनुराग श्रीवास्तव ने कहा…

धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष!

इस जन्म में तो पत्नि की इच्छानुसार गणपति बप्पा से वही मांगिये जो वो कहती हैं अन्यथा 'ब्रूफ़ेन' की गोलियां ले कर पत्नि के पीछे पीछे दौड़ना पड़ेगा कि प्रिये ये खा लो और मुंह की सूजन दूर करो।

तत्पश्चात, प्रभु की तपस्या करिये कि वह जीवन-मरण के चक्र से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करे। इस प्रकार आप ना केवल जन्म मृत्यु के अविरत चक्र से मुक्ति पायेंगे बल्कि, पत्नि नामक नर भक्षी जीव से भी छुटकारा पायेंगे।

Pankhudi ने कहा…

Patni roopi suoper computer ke data base mein viswas roopi virus ka pravesh karayen,Vishwas Bhakti(?) se aata hai aur Bhakti,Shradha(?) se.Shradha aur saburi yeh hi is
Jeevan aur us(?) Jeevan ke aadhar stambh hain.
Prof.Pattu.Baroda
Mangalwar,10 Oct.

manisha ने कहा…

bhabhisri ki tippiki nahi nazar aa rahi hai?

manisha ने कहा…

patni koi bhi mile kisi bhi janam me sab ek se hoti hai ..isliye jyada mathapachchi me samay mat gawayew....anuj bhai ki sune aur jeevan-maran ke charkra se nikalne ki souche

brijmohan ने कहा…

pahali bat bhondu ko bhondu kahana apman nahi hota; doosri bat ughone
agle janm ka bhi sath manga hai yahan ""bhi""shabd mahatwapurna hai matlab pahale bhi iron karati rahi hai'ap bhi agle janm ka hi sath mangiye iron karne ka abhyas ho jayega'kapde dhona aur khana pakane ka bh abhyas kar lijiye taki unhe agle janm men pareshani na ho

brijmohan ने कहा…

pahali bat bhondu ko bhondu kahana apman nahi hota; doosri bat ughone
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brijmohan ने कहा…

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brijmohan ने कहा…

pahali bat bhondu ko bhondu kahana apman nahi hota; doosri bat ughone
agle janm ka bhi sath manga hai yahan ""bhi""shabd mahatwapurna hai matlab pahale bhi iron karati rahi hai'ap bhi agle janm ka hi sath mangiye iron karne ka abhyas ho jayega'kapde dhona aur khana pakane ka bh abhyas kar lijiye taki unhe agle janm men pareshani na ho